Friday, December 5, 2008

आज की ताजा खबर





आज की ताजा खबर


डिजाइन .....मनीष दुबे
ड्रांइग.........विनय अम्बर
कविता.......ब्रतोल्ड ब्रेख्त
कम्पोजिंग.....अमित विश्वकर्मा
इत्यादि ग्रुप आँफ आर्टिस्ट
man_manishd@yahoo.co.in

Thursday, November 27, 2008

ठिठुरता माँगे एक मुठ्ठी धूप



फिर बम फटे,
निकली राजनैतिक फायदो की आग,
प्रत्यारोपो का धुँआ,
फिर खूब बिकें अखबार,
नपुंसक शांती के चीथडे,
फिर हुआ साफ,
मीडिया की कमाई का रास्ता,
टीम इंग्लैण्ड लौटी अपने घर,
मिला विराम खेलो को,
नए तरीके से खेले जाएगे,
मिला विषय चाय के ठेलो को,
उपजी पुनः चिंता की रेखाएँ नेताओ की तोंदो पर,
फिर गिरी गाज,
वादो का ईसबगोल तलाशती चमचो की फोजो पर,
इसी दौरान बढा लिया लोकतंत्र ने अपना ईमान,
शांतीपूर्ण संपन्न हुआ मतदान,
निकल आए चमनप्राश के डिब्बे,
मूक लोग कंबलो में दुबके,
गजब ठंड है,अबके।।

Friday, November 21, 2008

विवेचना रंगमण्डलःराष्ट्रीय नाट्य समारोह

विवेचना रंगमण्डलःराष्ट्रीय नाट्य समारोह

परफार्मिंग आर्ट पर छायाचित्र प्रतियोगिता

विवेचना रंगमण्डल द्वारा आयोजित राष्ट्रीय नाट्य समारोह कर अन्तर्गत रंगमण्डल एंव मिलन फोटोग्राफिक सोसाइटी(मिफोसो) संयुक्त रुप से एक छायाचित्र प्रदर्शनी एंव प्रतियोगिता का आयोजन कर रही है। प्रतियोगिता का विषय है॑ परफार्मिंग आर्ट इसके अन्तर्गत छायाकार नाटक,नृत्य,समूह नृत्य,नुक्कड नाटक आदि अन्य कला विषयो पर आधारित कलात्मक छायाचित्र कम से कम 8 गुणा 12 आकार व अधिकतम 12 गुणा 15 आकार में 25 दिसम्बर तक जमा कर सकते है। रुप फोटो ग्राफर्स,चौथा पुल,सौरभ स्टूडियो,भातखंडे स्कूल के पास एंव आकार स्टूडियो,बस स्टेंड में जमा करा सकते है।
विवेचना के राष्ट्रिय नाट्य समारोह में मंचित होने जा रहें नाटको की सूची इस प्रकार हैः

दिनाँक नाटक प्रस्तुति लेखक निर्देशक
3/1/9 - हयवदन - होम सांईस कालेज,जबलपुर - गिरीश कर्नाड - आशीष पाठक.
(7.30pm)
(8.30pm) - मधुशाला - गुडी,रायगढ - हरिवंशराय बच्चन - योगेन्द्र चौबे.

4/1/9 - एनांयस - बाम्बे थियेटर कम्पनी,मुंबई- सैम बाँबरिक -शेख समी उस्मान.
(7.30pm)



5/1/9 -पाँपकार्न -समागम रगंमंडल,जबलपुर -आशीष पाठक - आशीष पाठक.
(7.30pm)
(8.30pm) -भागीरथ के बेटे -विनोद रस्तोगी स्मृति,इलाहाबाद -विनोद रस्तोगी -................... .



6/1/9 -नमक मिर्च -AK various,मुंबई -शौकत थानवी -सुमित व्यास,
(7.30pm) शिवानी टकसाले.


7/1/9 - गोदान -मंच,मुबंई -प्रेमचंद -विजय कुमार.
(7.30pm)

(8.30pm) - अब हम बिहार से चुनाव लडेंगें -मंच,मुबंई -हरिशंकर परसाई -विजय कुमार.


8/1/9 -फादर -दोस्त,भोपाल -आँगस्ट स्ट्राईनबर्ग - आलोक चटर्जी.
इस वर्ष के विवेचना रंग सम्मान से विख्यात अभिनेता/निर्देशक श्री आलोक चटर्जी को सम्मानित किया जावेगा।
नाट्य समारोह के आमत्रंण/भागीदारी/ प्रतियोगिता/नाटको सम्बधित जानकारियो हेतु सम्पर्क करेः
१. श्री अरुण पाण्डे 09893702736
२.श्री आशुतोष द्विवेदी 09425324635
३.श्री नवीन चौबे 09425386810
४.आशीष पाठक 09301111263

Tuesday, August 12, 2008

जिंदगी ड्रांइग रुम में...





जिंदगी ड्रांइग रुम में...



बन जाओ एक फोटो फ्रेम,
लग जाओ किसी ड्रांइग रुम में,
बदलते चेहरे,
बदलते दृश्य,
समेटो किसी को अपनें अंदर,
निकाल फेंको अगले ही पल,
दूसरा फिर कोई फ्रेम में,
जिंदगी ड्राइंग रुम में,
चलती किसी फ्रेम में।।

Tuesday, July 29, 2008

हे प्रभु।। हे नायिका।।



हे प्रभु।। हे नायिका।।


ह्रदय गीत की आहट सुन,
हे चंचल सुन हो रवि किरण तुम,
जाग्रत प्रातः का जाग्रत मन,
तुम तुम और केवल तुम।।
मूक शब्दावली नहीं मनः धुन,
सितार झनक नही झंकार तुम,
निराकार संगीत का आकृत तन,
तुम तुम और केवल तुम।।
चहक महक सब मोती संग बुन,
गायक मै और श्रोता तुम,
कभी नीर क्षीर कभी चंदन वन,
तुम,तुम और केवल तुम।।
पर्वत मिलन को आतुर घन,
ह्रदयगीत का माधुर्य तुम,
गेय पद और गायक जन,
तुम,तुम और केवल तुम।।
शांत,दक्ष,योग्य और सारे गुण,
मै विश्लेषक विशेष हो तुम,
कोसो दूर कभी निकटता का फन,
तुम,तुम और केवल तुम।।


प्रभु,नायिका दोनो ही अब तक अप्राप्त।। प्राप्ति पर सिर्फ संतुष्टि देते,जो मेरे काम आती।।नहीं मिले तो कविता,सबके काम की,आलोचक बघिया उधेडेंगें,ब्लागर टिपण्णी करेंगे.........................................

Sunday, July 20, 2008

डिनर पालिटिक्स



डिनर पालीटिक्स
सभी सादर आमत्रित है,
जो सांसद है,
जिनके मुहँ घोडे से है।
सभी दल आ जाए,
रात्री भोज में,
भले संख्या में थोडे से है।
प्रार्थना करके आए,
हे! प्रभु हर बार रखना लाज,
कैसे भी हो हालात,
सांसद जरूर बनाना प्रभु,
कोई सकंट ना आए,
किंतु! सरकार पर अवश्य आ जाए,
उसी समय देना मुहँ घोडे सा,
और देना आमंत्रण डिनर का प्रभु।
लोकतन्त्र का हाथी चलाना है,
सबको डिनर पर आना है।
जो सांसद बीमार है,वर्षो से
उन पर जादू हो जाएगा,
चमत्कारी ढंग से खडे हो जाएगें,
एअर एम्बूलेन्स आएगी,
गोद में बिठा कर ले जाएगी।
ईतावली सूप मँगवाया है,
पहले भूख बढा लेना,
फिर "प्राइस टेग" लगा लेना।
तुम पर जब रथ बाँधा गया था,
अर्जुन ,गाण्डीव लिए हाँफ रहा था,
कृष्ण तुमको हाँक रहा था।
तुम्हारी स्मृतियो में भरी है,
बात याद करो,
सब रिश्ते झूठे, आगे बढो।
अरे नादान!
घूरे के भी दिन फिरते है,
पहले रथ में बँधते थे,
अब करोडो में बिकते है।
रिश्तो,नातो,विचारो से पीठ करो,
लोकतंत्र का हाथी लोगो पर ही "शिट" करे,
अमेरिका अपना पपलू "फिट" करें,
तुम ना घबराना पार्थ वाहक!
डेमोक्रेटिक मोनार्की में ,
कम्यूनिस्ट केपिटल्सम मिला लेना,
जाते ही, चार पेग काकटेल चढा लेना।
फिर देखना हाथी चलता नजर आएगा,
घोडे खुशी से झूम उठेंगें,
लोकतंत्र बच गया,
डिनर हो गया,
हाथी चल गया,
हाथी चल गया।

Saturday, July 5, 2008

समागम रंगमण्डल,जबलपुर का आयोजन




समागम रंगमण्डल,जबलपुर का आयोजन
स्व.कश्यप झा स्मृति नाट्योत्सव
दिनाँक २५ जून को होमसांइस कालेज प्रेक्षागृह में यह आयोजन समंपन्न हुआ। कश्यप जी ने शहर ही नहीं अपितु देश के कई बडे रंगमण्डलो के साथ कार्य किया। वें कला निर्देशक थे,मंच सज्जा,रूप सज्जा मे उन्हे विशेष महारत प्राप्त थी। साथ ही लोक कलाओ की तरफ उनका रुझान था,लोक वाद्य वादन,गायन,नृत्य के साथ ही अभिनय भी किया। उपलब्धियो की लंबी फेहरिस्त के साथ साथ कश्यप आज भी सभी साथी कलाकारो के दिल में जिंदा है। मशहूर निर्देशिका नादिरा बब्बर के साथ भी कश्यप ने खूब काम किया,जो उनकी प्रशंसक भी है।यह उनकी तृतीय पुण्य तिथी थी।
समागम रंगमण्डल,प्रगतिशील साहित्य और रंगकर्म हेतु प्रतिबद्ध है,जिसके आयोजन लोकाश्रय पर होते है। इस दिन समागम ने दो नाटको का मंचन कर कश्यप को श्रद्धांजली दी।साथ ही श्री राजेश दुबे जी की कार्टून प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। जिसका शीर्षक था रंग परसाई ,यह एक अभिनव प्रयोग था,परसाई जी की व्यंग वारिधियो,सूत्र वाक्यो पर राजेश जी ने कार्टून बना कर अदभुत नजारा प्रस्तुत किया,जिसे खूब सराहा गया। फलस्वरुप एक प्रथक ब्लाग www.rangparsai.blogspot.cm भी बना दिया गया है।
"पापकार्न"एंव "सोमनाथ नाटको का मंचन भी हुआ।पापकार्न एक कहानी मंचन है।यह कथा है,रुपक की जो गाँव ने सेना में भर्ती होने शहर आता है और परस्तिथीवश पापकार्न बेचने लगता है,चलती ट्रेन मे विविध सज्जनो से भेट करता है,जिससे हास्य व्यंग पैदा होता है।टुकिया स्टेशन पर रहने वाली पागल जो सबको टकटकी लगाए देखती है,उसकी सबसे अच्छी साथी है।रुपक का जीवन जीवटता का प्रतीक बनता है,एक आम भारतीय से जुडे प्रश्नो को हँसी हंसी में बहुत गंभिरता से उढाता है,टुकिया के साथ एक हादसा उसे हिला देता है।पापकार्न बताता है,मानवजीवन टाईम पास नही है। अर्थव्यवस्था के शोर में नैतिकता हाशिये पर आ रही है।पापकार्न का मूल संदेश है। परिकल्पना,पटकथा,निर्देशन आशीष पाठक,रुपक का अभिनय विनय शर्मा,मंच परिकल्पना विनय अम्बर,संगीत सुमित,प्रकाश दुबे जी का था।
"सोमनाथ" आचार्य चतुरसेन के उपन्यास पर आधारित है। एतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित यह कथा उस वक्त की है,जब मेहमूद गजनवी सोलह बार हिंदुस्तान को अपनी तलवार और आग के हवाले कर चुका था और अब सत्रहवीं बार उसकी तुर्की बर्बर सेना कि नजर है,भव्य सोमनाथ मंदिर पर। मंदिर के अधिकारी की बाल विधवा बेटी शोभना,और एक विद्वान शूद्र देवकृष्ण की प्रेम कथा,उस समय मोड पर आ जाती है जब देवा मंदिर से शूद्र होने की वजह से निकाल दिया जाता है। अपमानित देवा अपने आत्मसम्मान की खोज मे गजनवी से मिलकर फतेह मोहम्मद हो जाता है। एक गुप्त राह से हमला कर वह सोमनाथ का गर्व भंग करता है,किंतु शोभना मौका पाकर उसका सिर कलम कर देती है़,और पहली बार अपना वैधव्य स्वीकार कर कहती है,कि वो एक शूद्र से प्रेम कर सकती है,एक म्लेछ से प्रेम कर सकति है,किंतु एक राष्ट्रद्रोही से नही।नाटक की पटकथा,निर्देशन आशीष पाठक ने किया।
दोनो ही नाटको का दर्शको ने भरपूर आनंद लिया,एक कलाकार को हम कलाकारो ने इस तरह याद किया।